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महामारी और रिसर्च (कौन रिसर्च कहाँ तक पहुँचा )ho raha samaaj

                                                                         भूमिका                                                 महामारी पीड़ितों को रिसर्चों से क्या मिला !     महामारी आई और चली गई ,लेकिन  भविष्य के लिए  अनेकों अनुत्तरित प्रश्न छोड़ गई है | जिनके उत्तर वर्तमान में भले न खोजे जा सके हों लेकिन भविष्य के लिए अवश्य खोज कर रख लिए जाने चाहिए अन्यथा कोरोना महामारी के समय जितना जो कुछ  जनधन का नुक्सान हुआ है वो तो जिस किसीप्रकार से सह लिया गया है किंतु भविष्य की महामारियों में  इससे भी बड़ा नुक्सान हो सकता है | ऐसी कल्पना करनी चाहिए |        नुक्सान की दृष्टि से देखा जाए तो भारत को पडोसी देशों के साथ लगभग 3 युद्ध लड़ने पड़े हैं | ...
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10-7-2026 कोरोनामहामारी और प्राचीनविज्ञान

       जिसप्रकार से किसी फिल्म में एक पटकथा लेखक होता है | एक निर्देशक होता है | कुछ अभिनेता होते हैं |पट कथा लेखक उस कहानी को लिखता है | निर्देशक उन कलाकारों को अभिनय के लिए प्रशिक्षित करता है | उसी पटकथा के अनुसार निर्देशक के निर्देशन में अभिनेता लोग अपनी अपनी  भूमिका निभाते हैं | दर्शक लोग केवल अभिनय देखते हैं, समझदार लोग निर्देशन की बारीकियों पर भी ध्यान देते हैं ,जबकि ज्ञानी लोग  पटकथा की गुणवत्ता को भी समझते हैं |      इसी प्रकार से इस ब्रह्मांड का सृजन करने वाली सर्वोच्च शक्ति  ही भूकंप आँधी तूफ़ान बज्रपात चक्रवात महामारी आदि प्राकृतिक घटनाओं की पटकथा  लेखक होती है | उन घटनाओं को घटित कब कैसे होना है | उसका निर्देशन समय करता है | उस सर्वोच्च शक्ति की पटकथा के अनुशार समय के निर्देशन में भूकंप आँधी तूफ़ान बज्रपात चक्रवात महामारी आदि घटनाएँ घटित होती हैं | ये घटित होते रंगमंच अर्थात सामने दिखाई पड़ती हैं | यही उनका अभिनय होता है |          विशेष बात ये है कि  रंगमंच पर न तो पटकथा लेखक दिखाई पड़ता ह...

प्राकृतिक

                                        कोरोना महामारी की सच्चाई                                                                   और                                                                           प्राचीन विज्ञान         दो शब्द        वर्तमानसमय में  विज्ञान  अत्यंत उन्नत  है|  वैज्ञानिक  विद्वान  हैं|  अनुसंधान   निरंतर हो  रहे हैं|वैज्ञानिक अनुसंधानों में सरकारें भी पूरी रुचि ले रही हैं | आवश्यक सारे संसाधन समय से उपलब्ध करवा रही हैं...