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kitaab17-2-2026

  महामारीवैज्ञानिकों  का कर्तव्य !       कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि  कोरोना संबंधीसंक्रमण बढ़ने का कारण मौसम संबंधी प्राकृतिक घटनाएँ होती हैं | वैज्ञानिकों की इस बात को यदि सच मान लिया जाए तो महामारी को समझने के लिए मौसम को समझना पड़ेगा | महामारी के बिषय में सही अनुमान पूर्वानुमान लगाने के लिए मौसम के बिषय में सही अनुमान पूर्वानुमान लगाना सीखना होगा |       हमारे मौसमसंबंधी सही अनुमान पूर्वानुमान लगाने को कहने का मतलब यह नहीं है  कि सुदूर आकाश में उड़ते हुए बादलों आँधी तूफानों चक्रवातों को  उपग्रहों से देख लिया जाए  फिर उनकी गति और दिशा के अनुसार उनके किसी दूसरे स्थान पर पहुँचने के बिषय में अंदाजा लगा लिया जाए | यह तो दूर आकाश में उड़ते हुए बादलों आँधी तूफानों को कुछ पहले देख लेने का जुगाड़ मात्र है |इस जुगाड़ से चक्रवातों को कुछ पहले देख लेने से लोगों को सुरक्षित बचाने में मदद भी मिल जाती है किंतु ये विज्ञान नहीं है |        प्राकृतिक घटनाओं की जासूसी कर लेने में विज्ञान जैसा क्या है | जिसके द्वा...
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मनोरोग और सावधानियाँ

 किसी के शरीर में बाहर से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता तब पड़ती है ,जब शरीर में रक्त बनना बंद हो जाता है |ऐसे शरीरों के अंदर रक्त बनना  यदि प्रारंभ न हो  तो बाहरी रक्त चढ़ाकर किसी को लंबे समय तक स्वस्थ नहीं रखा जा सकता है |        इसी प्रकार से बेचैनी घबड़ाहट आदि बढ़ती जा रही हो तो बनावटी हँसी खुशी हमें लंबे समय तक प्रसन्न नहीं रख सकते | अपने मन की बेचैनी घबड़ाहट परेशानी की वेदना को समाप्त करने का रास्ता खोजने के बजाय हम अपनी  बेचैनी को दबाने में लगे रहते हैं | ऐसे थोड़ा बहुत तो समय बिताया जा सकता है किंतु बहुत लंबा समय नहीं बिताया जा सकता है | यदि ऐसा  किया जाता है तो यही बेचैनी ब्यभिचारों हत्याओं आत्महत्याओं या अन्य प्रकार के अपराधों के रूप में विस्फोट करती है | लोग कहते सुने जाते हैं कि छोटे छोटे कारणों में बड़ी बड़ी घटनाएँ अपराध आदि घटित होते देखे जा रहे हैं  ,जबकि यह सच नहीं है सच तो यह है कि  लोग बड़ी बड़ी घटनाओं को मनों में दबाए बैठे होते हैं | उसका विस्फोट कब हो जाएगा किसी को पता नहीं होता है | प्राचीन काल   में लोग ...

10-6-2025 महामारी

                                                                            दो शब्द      विश्व के सबसे प्राचीन गणितविज्ञान की ऐसी सक्षम विधा सनातनधर्मियों के पास है| जिसके द्वारा प्रकृति और जीवन में घटित होने वाली घटनाओं के न केवल कारणों को गणित के आधार पर समझा जाता रहा है,प्रत्युत उनके विषय में पूर्वानुमान भी लगा लिया जाता रहा है|  सनातनधर्मियों को यह विज्ञान परंपरा से प्राप्त हुआ है| इसके आधार पर अभी भी समाज में घटित होने वाली घटनाओं को तो समझा जा ही सकता है | उसके साथ ही साथ समस्त प्राकृतिक वातावरण में समय समय पर होते रहने वाले परिवर्तनों को भी समझा जा सकता है और उनके विषय में महीनों वर्षों पहले पूर्वानुमान भी लगाया जा सकता है |     सनातन धर्म के प्राचीन वैज्ञानिकऋषि मुनि इसीविज्ञान के द्वारा भूकंप आँधी तूफ़ान वर्षा बाढ़ चक्रवात बज्रपात जैसी घटनाओं के विषय में आगे ...