अनुसंधानोंमें चूक कहाँ हुई ! इतनी बड़ी महामारी अभी आ कर गई है |उस के बिषय में किए गए अनुसंधानों से प्राप्त अनुभवों के आधार पर बिचार किया जाना चाहिए कि कोरोना महामारी को समझने में विश्व वैज्ञानिक कितने प्रतिशत सफल रहे तथा भविष्य की महामारियों को समझने में वे कितने समर्थ हैं | जिस प्रकार से प्रत्येक बड़ी घटना से सुरक्षा के लिए किए गए उपायों के बिषय में समीक्षा की जाती है कि यही घटना यदि अभी फिर से घटित होने लगे तो उससे समाज को सुरक्षित बचाने में उन्हीं उपायों के आधार पर कितने प्रतिशत सफल हुआ जा सकता है | ये बिचार किया जाता है | इसी प्रकार से कोरोना महामारी से सुरक्षा के लिए किए गए उपायों के बिषय में समीक्षा की जानी चाहिए | मह...
महामारी के बिषय में क्या खोजा और क्या पाया ! किसी घटना के बिषय में केवल रिसर्च रिसर्च करना ही रिसर्च का उद्देश्य नहीं होता है और न ही रिसर्च के नाम पर कुछ भी करने लगना और बाद में उस घटना के बिषय में कुछ भी बताने लगना भी रिसर्च नहीं है | रिसर्च का मतलब जिस घटना के बिषय में जो कुछ भी किया जाए उसके आधार पर जो कुछ भी पता लगाया जाए उसमें से इतना तो सच निकले | जिससे उसे तीर तुक्कों से अलग वैज्ञानिक अनुसंधानों जैसा कुछ तो लगे | रिसर्च किया जाना इतना ही आसान होता तो भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना हुए डेढ़ सौ वर्ष बीत गए | रिसर्च के नाम पर कुछ न कुछ किया तो जाता है किंतु इसके बाद भी ऐसा कोई विज्ञान नहीं खोजा जा सका है | जिसके आधार पर वर्षा आँधी तूफानों या भूकंपों की प्रकृति को सही सही समझा जा सके और उसके आधार पर सही सही अनुमान पूर्वानुमान आदि लगाया जा सके | उपग्रहों से देखकर बादलों चक्रवातों की दिशा और गति का अंदाजा लगाया जाता है कि ये कब कहाँ पहुँच सकते हैं | यह विज्ञान नहीं है | यह तो एक ऐसा जुगाड़ है | जिसक...