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      एक वर्ष के अंदर एक लावारिस मीटर की 4 बार श्रेणी बदला जाना, 2 बार मीटर बदला जाना, 2 बार इन्फोर्समेंट की रेड पड़ना | पेनाल्टी बिल माफ किया जाना, नित्य उपयोग किया जा रहा बिल माफ किया जाना, 2 बार व्यावसायिक मशीनें चलते रहने के बाद भी कमर्शियल मीटर हटाकर डोमेस्टिक मीटर लगा दिया जाना BSES के काम काज में व्याप्त पद दुरुपयोग , पक्षपातपूर्ण  कार्य संचालन एवं भ्रष्टाचार पूर्ण कार्यशैली का संशय पैदा करता है |       BSES में अपने कार्य करवाने के कुछ खुले नियम हैं जो जनजन को पता हैं | ऐसे नियमों को ताख में रखकर जब BSES के अधिकारी किसी को लाभ पहुँचाते हैं तो लापरवाही या भ्रष्टाचार लगता है | लापरवाही एक जगह या एक बार हो सकती है किंतु बार बार नियमों का उल्लंघन करके किसी एक व्यक्ति के गैरकानूनी रूप से बिजली का उपयोग करने में BSES के क्षेत्रीय अधिकारियों के द्वारा गैर कानूनी रूप से साथ दिए जाने से भ्रष्टाचार का संशय होना स्वाभाविक ही है |  
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महामारी और रिसर्च (कौन रिसर्च कहाँ तक पहुँचा )

                                                                    दो शब्द                  महामारी के मानवों से हुए युद्ध में क्या बिना हथियारों के ही लड़ते रहे वैज्ञानिक !            मृत्यु ,महामारी,आपदाएँ और दुर्घटनाएँ हमेंशा अचानक ही आया करती हैं | इनसे अपनी सुरक्षा तभी की जा सकती है जब इनसे सुरक्षा की तैयरियाँ इनके आने के पहले ही करके रख ली जाएँ | ऐसा किया जाना तभी संभव है जब ऐसी कौन घटना कब घटित होने वाली है | इसके बिषय में पहले से पूर्वानुमान पता हो तो सुरक्षा संबंधी मजबूत तैयारियाँ  करने के लिए समय मिल सकता है | किसी घटना के बिषय में सही पूर्वानुमान लगाना तभी संभव है जब उस घटना के घटित होने का सही कारण पता हो | हर घटना के घटित होने का कोई न कोई कारण अवश्य होता होता है |  कारण के बिना पत्ता भी नहीं  हिल सकता है |   कारण...

10-7-2026 कोरोनामहामारी और प्राचीनविज्ञान

       जिसप्रकार से किसी फिल्म में एक पटकथा लेखक होता है | एक निर्देशक होता है | कुछ अभिनेता होते हैं |पट कथा लेखक उस कहानी को लिखता है | निर्देशक उन कलाकारों को अभिनय के लिए प्रशिक्षित करता है | उसी पटकथा के अनुसार निर्देशक के निर्देशन में अभिनेता लोग अपनी अपनी  भूमिका निभाते हैं | दर्शक लोग केवल अभिनय देखते हैं, समझदार लोग निर्देशन की बारीकियों पर भी ध्यान देते हैं ,जबकि ज्ञानी लोग  पटकथा की गुणवत्ता को भी समझते हैं |      इसी प्रकार से इस ब्रह्मांड का सृजन करने वाली सर्वोच्च शक्ति  ही भूकंप आँधी तूफ़ान बज्रपात चक्रवात महामारी आदि प्राकृतिक घटनाओं की पटकथा  लेखक होती है | उन घटनाओं को घटित कब कैसे होना है | उसका निर्देशन समय करता है | उस सर्वोच्च शक्ति की पटकथा के अनुशार समय के निर्देशन में भूकंप आँधी तूफ़ान बज्रपात चक्रवात महामारी आदि घटनाएँ घटित होती हैं | ये घटित होते रंगमंच अर्थात सामने दिखाई पड़ती हैं | यही उनका अभिनय होता है |          विशेष बात ये है कि  रंगमंच पर न तो पटकथा लेखक दिखाई पड़ता ह...

प्राकृतिक

                                        कोरोना महामारी की सच्चाई                                                                   और                                                                           प्राचीन विज्ञान         दो शब्द        वर्तमानसमय में  विज्ञान  अत्यंत उन्नत  है|  वैज्ञानिक  विद्वान  हैं|  अनुसंधान   निरंतर हो  रहे हैं|वैज्ञानिक अनुसंधानों में सरकारें भी पूरी रुचि ले रही हैं | आवश्यक सारे संसाधन समय से उपलब्ध करवा रही हैं...