दो शब्द महामारी के मानवों से हुए युद्ध में क्या बिना हथियारों के ही लड़ते रहे वैज्ञानिक ! किसी भी रोग से समाज को सुरक्षित बचाने के लिए या उस रोग से पीड़ित रोगी को रोगमुक्ति दिलाने के लिए उस रोग की पहचान की जानी सबसे पहले आवश्यक होती है |कोरोना महामारी की निश्चित पहचान पता ही नहीं है | कोरोना महामारी को जितना पहचाना गया | उसके आधार पर जो जो कुछ बताया गया और उसी के आधार पर महामारी बिषयक जो अनुमान पूर्वानुमान आदि लगाए गए | वे गलत निकलते चले गए | इससे ये प्रमाणित होता है कि जो पता लगाया गया था वो सही नहीं था |यदि वो सही होता तो उसके आधार पर लगाए गए अनुमान पूर्वानुमान आदि भी सही निकलते | उसके गलत निकलने का मतलब है कि महामारी ...
जिसप्रकार से किसी फिल्म में एक पटकथा लेखक होता है | एक निर्देशक होता है | कुछ अभिनेता होते हैं |पट कथा लेखक उस कहानी को लिखता है | निर्देशक उन कलाकारों को अभिनय के लिए प्रशिक्षित करता है | उसी पटकथा के अनुसार निर्देशक के निर्देशन में अभिनेता लोग अपनी अपनी भूमिका निभाते हैं | दर्शक लोग केवल अभिनय देखते हैं, समझदार लोग निर्देशन की बारीकियों पर भी ध्यान देते हैं ,जबकि ज्ञानी लोग पटकथा की गुणवत्ता को भी समझते हैं | इसी प्रकार से इस ब्रह्मांड का सृजन करने वाली सर्वोच्च शक्ति ही भूकंप आँधी तूफ़ान बज्रपात चक्रवात महामारी आदि प्राकृतिक घटनाओं की पटकथा लेखक होती है | उन घटनाओं को घटित कब कैसे होना है | उसका निर्देशन समय करता है | उस सर्वोच्च शक्ति की पटकथा के अनुशार समय के निर्देशन में भूकंप आँधी तूफ़ान बज्रपात चक्रवात महामारी आदि घटनाएँ घटित होती हैं | ये घटित होते रंगमंच अर्थात सामने दिखाई पड़ती हैं | यही उनका अभिनय होता है | विशेष बात ये है कि रंगमंच पर न तो पटकथा लेखक दिखाई पड़ता ह...