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महामारी और रिसर्च (कौन रिसर्च कहाँ तक पहुँचा )

                                                                       दो शब्द                  महामारी के मानवों से हुए युद्ध में क्या बिना हथियारों के ही लड़ते रहे वैज्ञानिक !        किसी कड़ाही में दूध उबल रहा हो वो कब तक उबलेगा यदि इसका अनुमान पूर्वानुमान आदि लगाना है तो इसका वास्तविक कारण खोजना  पड़ेगा | इसका  कारण कड़ाही के नीचे आग का जलना है | आग जलने का कारण उसमें रखे ईंधन की मात्रा होती है | इसका मतलब आग जलने के लिए ईंधन जितनी देर का है| उतनी देर तक दूध उबलता रहेगा | ऐसे अनुमान लगाया जा सकता है |       इसी घटना को अनुसंधान की दृष्टि से देखा जाए तो चुने गए कारण सही हैं या नहीं इसका परीक्षा किया जाना आवश्यक  होता है | इसलिए आग को निरंतर देखते हुए यह निश्चय करना होगा कि क्या आग जब धीमी हो रही है तब दूध का उबाल...
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10-7-2026 कोरोनामहामारी और प्राचीनविज्ञान

       जिसप्रकार से किसी फिल्म में एक पटकथा लेखक होता है | एक निर्देशक होता है | कुछ अभिनेता होते हैं |पट कथा लेखक उस कहानी को लिखता है | निर्देशक उन कलाकारों को अभिनय के लिए प्रशिक्षित करता है | उसी पटकथा के अनुसार निर्देशक के निर्देशन में अभिनेता लोग अपनी अपनी  भूमिका निभाते हैं | दर्शक लोग केवल अभिनय देखते हैं, समझदार लोग निर्देशन की बारीकियों पर भी ध्यान देते हैं ,जबकि ज्ञानी लोग  पटकथा की गुणवत्ता को भी समझते हैं |      इसी प्रकार से इस ब्रह्मांड का सृजन करने वाली सर्वोच्च शक्ति  ही भूकंप आँधी तूफ़ान बज्रपात चक्रवात महामारी आदि प्राकृतिक घटनाओं की पटकथा  लेखक होती है | उन घटनाओं को घटित कब कैसे होना है | उसका निर्देशन समय करता है | उस सर्वोच्च शक्ति की पटकथा के अनुशार समय के निर्देशन में भूकंप आँधी तूफ़ान बज्रपात चक्रवात महामारी आदि घटनाएँ घटित होती हैं | ये घटित होते रंगमंच अर्थात सामने दिखाई पड़ती हैं | यही उनका अभिनय होता है |          विशेष बात ये है कि  रंगमंच पर न तो पटकथा लेखक दिखाई पड़ता ह...

प्राकृतिक

                                        कोरोना महामारी की सच्चाई                                                                   और                                                                           प्राचीन विज्ञान         दो शब्द        वर्तमानसमय में  विज्ञान  अत्यंत उन्नत  है|  वैज्ञानिक  विद्वान  हैं|  अनुसंधान   निरंतर हो  रहे हैं|वैज्ञानिक अनुसंधानों में सरकारें भी पूरी रुचि ले रही हैं | आवश्यक सारे संसाधन समय से उपलब्ध करवा रही हैं...