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प्राकृतिक

                                            महामारी संबंधी अनसुलझे सवाल !      वर्तमानसमय में  विज्ञान  अत्यंत उन्नत  है|  वैज्ञानिक  विद्वान  हैं|  अनुसंधान   निरंतर हो  रहे हैं|वैज्ञानिक अनुसंधानों में सरकारें भी पूरी रुचि ले रही हैं | आवश्यक सारे संसाधन समय से उपलब्ध करवा रही हैं | अनुसंधान कार्यों में लगे लोगों को पर्याप्त पारिश्रमिक सुख सुविधाएँ आदि प्रदान की जा रही हैं | विशिष्ट पद प्रतिष्ठा प्रदान की जा रही है अनुसंधानों एवं अनुसंधानकर्ताओं पर खर्च की जाने वाली धनराशि का भार वहन टैक्स रूप में जनता करती आ रही है |      इतना सबकुछ होने के बाद भी न तो प्राकृतिक घटनाओं के बिषय में कुछ पता लगाया जाना संभव हो पाया है और न ही महामारी के बिषय में ! जिन प्राकृतिक घटनाओं या महामारियों को समझने या उनके बिषय में अनुमान पूर्वानुमान लगाने के लिए जो लक्ष्य निर्धारित किए गए थे उनकी ओर तिल भर भी बढ़ना संभव नहीं...
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आधुनिक अनुसंधान

                                                       विज्ञान के बिना पूर्वानुमान कैसे संभव है !                               पानी से  भरे गहरे गड्ढे में कोई चीज गिर गई हो वो कहाँ है | इसे खोजने के दो प्रकार हैं | कोई ऐसा यंत्र खोजा जाए जिसके सहयोग से पानी के अंदर देखा जा सकता हो | ये वैज्ञानिक प्रकार है और दूसरा अंदाजे से उस  वस्तु  को खोजा जाए | मिले तो मिल जाए न मिले तो न मिले |      इसीप्रकार से मौसम संबंधी  कोई प्राकृतिक घटना या महामारी जैसी कोई घटना भविष्य में कब घटित होगी | यह पता लगाने के लिए दो प्रकार हैं | एक तो अनुसंधानपूर्वक कोई ऐसा यंत्र खोजा जाए | जिसके सहयोग से भविष्य में झाँका जा सकता हो | उसकी मदद से भविष्य में घटित होने वाली संभावित घटनाओं को पहले से देख लिया जाए  और दूसरा बिना किसी वैज्ञानिक आधार के ऐसी घट...