दो शब्द मनुष्यों का नुक्सान महामारी आने से नहीं महामारी से संक्रमित होने से होता है | इसलिए अनुसंधानों का लक्ष्य मनुष्यों को महामारियों से संक्रमित होने से बचाना है | अतिवर्षा बाढ़ भूकंप बज्रपात जैसी घटनाएँ उन सघन जंगलों मरुस्थलों में या समुद्रों में में घटित होती रहती हैं | जहाँ मनुष्यों की बस्तियाँ नहीं होती हैं तो किसी का उनसे नुक्सान नहीं होता है | इसलिए किसी को उनके बिषय में पता नहीं लग पाता है | ऐसे ही महामारी को यदि प्राकृतिक माना जाए तो इसके बिषाणु भी वातावरण में वायुस्वरूप में विद्यमान रहते होंगे | उससे लोग जब संक्रमित होने लगते हैं तो महामारी आने के बिषय में पता लग जाता है ,अन्यथा पता ही नहीं लगता कि महामारी आई थी | वर्षा होने पर सभी भीगते ...