जिसप्रकार से किसी फिल्म में एक पटकथा लेखक होता है | एक निर्देशक होता है | कुछ अभिनेता होते हैं |पट कथा लेखक उस कहानी को लिखता है | निर्देशक उन कलाकारों को अभिनय के लिए प्रशिक्षित करता है | उसी पटकथा के अनुसार निर्देशक के निर्देशन में अभिनेता लोग अपनी अपनी भूमिका निभाते हैं | विशेष बात ये है कि रंगमंच पर न तो पटकथा लेखक दिखाई पड़ता है और न ही निर्देशक दिखाई पड़ता है | वहाँ केवल अभिनेता दर्शकों के सामने प्रत्यक्ष नाटक आदि प्रस्तुत कर रहे होते हैं |
दर्शक लोग केवल अभिनय को देखते हैं समझदार लोग निर्देशन को देखते हैं जबकि ज्ञानी लोग पटकथा को देखते हैं
इसी प्रकार से इस ब्रह्मांड का सृजन करने वाली सर्वोच्च शक्ति ही पटकथा लेखक है समय ही निर्देशक है और और घटित हो रही प्राकृतिक घटनाएँ ही अभिनेता हैं |
जिस प्रकार से
उस अभिनय को देखकर अभिनेताओं की
पटकथा लेखक प्रशंसा केवल उनके अच्छे अभिनय के लिए की जाती है |
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